ग्रह किस भाव में है, यह दर्ज जन्म-समय के अनुसार पढ़ा गया है।
उनके जन्म के समय चंद्र ज्येष्ठा के लगभग अंतिम छोर पर था। दो घंटे से कम समय बाद, दोपहर लगभग 12:48 बजे, वह मूल नक्षत्र में चला गया। ज्येष्ठा के स्वामी बुध हैं, और उनकी कुंडली में बुध मेष राशि में बैठा है।
शुक्र पूरे दिन मीन में रहा, इसलिए जन्म का समय कुछ भी हो, यह बात सच रहती है। मंगल उससे लगभग दो अंश दूर है, और सूर्य भी इसी राशि में है। एक दशक से कुछ अधिक समय में उन्होंने लगभग 2,100 कलाकृतियाँ बनाईं।
चंद्र दोपहर लगभग 12:48 बजे वृश्चिक छोड़कर धनु में गया। उससे पहले जन्म होने पर चंद्र वृश्चिक में ही रहता है। वे लंबे समय तक अवसाद और बेचैनी के दौर से गुज़रे, और एक वर्ष मानसिक आरोग्य-आश्रम में रहे।
गुरु पूरे दिन धनु में रहा, और केतु उससे एक अंश के भीतर बैठा है। चित्रकारी अपनाने से पहले उन्होंने पादरी बनने की तैयारी की और बेल्जियम के बोरिनाज क्षेत्र में खनिकों के बीच प्रवचन दिए।
विन्सेंट वान गॉग की कुंडली का लग्न मिथुन है। ज़ुंडर्ट की स्थानीय घड़ी से मिथुन सुबह 8:43 से 11:03 बजे तक उदित रहा। सुबह 11 बजे का उनका दर्ज जन्म कर्क लग्न शुरू होने से केवल तीन मिनट पहले का है।
मीन राशि में तीन ग्रह जुटे हैं: सूर्य, मंगल और शुक्र। वहाँ शुक्र उच्च का है, यानी अपनी सबसे बलवान राशि में। गुरु अपनी ही राशि धनु में है।
चंद्र अपनी सबसे कमज़ोर राशि वृश्चिक में, ज्येष्ठा नक्षत्र में है। शनि भी अपनी सबसे कमज़ोर राशि मेष में है। जीवन भर उनकी बहुत कम कृतियाँ बिकीं, और 37 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। उनकी ख्याति मृत्यु के बाद आई। यहाँ कुंडली को उसी दर्ज जीवन के साथ पढ़ा गया है, उसके कारण के रूप में नहीं।
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| ग्रह | राशि | अंश | नक्षत्र | भाव | |
|---|---|---|---|---|---|
| लग्न | मिथुन | 29.39° | पुनर्वसु, पाद 3 | 1 | |
| सूर्य | मीन | 17.85° | रेवती, पाद 1 | 10 | |
| चंद्र | वृश्चिक | 28.93° | ज्येष्ठा, पाद 4 | 6 | नीच |
| मंगल | मीन | 4.32° | उत्तरा भाद्रपद, पाद 1 | 10 | अस्त |
| बुध | मेष | 3.80° | अश्विनी, पाद 2 | 11 | |
| गुरु | धनु | 2.47° | मूल, पाद 1 | 7 | मूलत्रिकोण |
| शुक्र | मीन | 6.25° | उत्तरा भाद्रपद, पाद 1 | 10 | उच्च |
| शनि | मेष | 24.16° | भरणी, पाद 4 | 11 | नीच |
| राहु | मिथुन | 1.67° | मृगशिरा, पाद 3 | 1 | वक्री |
| केतु | धनु | 1.67° | मूल, पाद 1 | 7 | वक्री |
ये योग दर्ज जन्म-समय पर पढ़े गए हैं।
| महादशा | आरंभ | समाप्ति |
|---|---|---|
| बुध | 30 मार्च 1853 | 9 अगस्त 1854 |
| केतु | 9 अगस्त 1854 | 9 अगस्त 1861 |
| शुक्र | 9 अगस्त 1861 | 9 अगस्त 1881 |
| सूर्य | 9 अगस्त 1881 | 9 अगस्त 1887 |
| चंद्र | 9 अगस्त 1887 | 9 अगस्त 1897 |
| मंगल | 9 अगस्त 1897 | 9 अगस्त 1904 |
| राहु | 9 अगस्त 1904 | 9 अगस्त 1922 |
| गुरु | 9 अगस्त 1922 | 9 अगस्त 1938 |
| शनि | 9 अगस्त 1938 | 9 अगस्त 1957 |
महादशा एक लंबी ग्रह-अवधि है, जो कई वर्ष चलती है। अंतर्दशा उसी के भीतर की छोटी अवधि है।
| तारीख़ | घटना | महादशा | अंतर्दशा |
|---|---|---|---|
| 26 मार्च 1885 | पिता थियोडोरस वान गॉग का दिल के दौरे से निधन | सूर्य | — |
| 1 मई 1888 | आर्ल के 'पीले घर' में चार कमरे किराये पर लिए | चंद्र | — |
| 23 अक्टूबर 1888 | साथ चित्र बनाने के लिए पॉल गोगाँ आर्ल पहुँचे | चंद्र | मंगल |
| 23 दिसंबर 1888 | एक झगड़े के बाद अपना बायाँ कान पूरा या आंशिक रूप से काट लिया | चंद्र | — |
| 8 मई 1889 | सें-रेमी के सें-पॉल-द-मोसोल मानसिक आरोग्य-आश्रम में भर्ती | चंद्र | राहु |
| 20 मार्च 1890 | पेरिस की 'इंडेपेंडाँ' प्रदर्शनी के पहले दिन उनकी कृतियाँ प्रदर्शित | चंद्र | राहु |
| 29 जुलाई 1890 | स्वयं को गोली मारने के दो दिन बाद ओवेर-सुर-वाज़ में निधन | चंद्र | — |
उनका जन्म-समय कई मोड़ों के पास है, इसलिए यहाँ कुछ अंतर्दशाएँ खाली छोड़ी गई हैं: 15 मिनट का अंतर उन्हें बदल देता।
आर्ल से आगे की हर घटना चंद्र की लंबी दशा में आती है, जो लगभग 1887 से 1897 तक चली। इसी अवधि में पीला घर, गोगाँ के साथ काम, कान की चोट, आश्रम और उनका निधन आते हैं।
इस कुंडली में चंद्र अपनी सबसे कमज़ोर राशि वृश्चिक में है। उसकी लंबी दशा में उनके सबसे फलदायी वर्ष भी आते हैं और सबसे कठिन वर्ष भी।