तीन राशियाँ, एक वक्री चाल
गुरु 2027 का आरंभ सिंह राशि में वक्री अवस्था में करते हैं; सिंह में वे 31 अक्टूबर 2026 को आए थे। 25 जनवरी को वे कर्क में लौटते हैं, 13 अप्रैल को वहीं मार्गी होते हैं, और फिर शेष वर्ष सीधी चाल से आगे बढ़ते हैं।
- कर्क, 25 जनवरी से 26 जून तक। कर्क गुरु की उच्च राशि है, जहाँ वे सबसे बलवान माने जाते हैं। वर्ष का पहला आधा भाग गुरु यहीं बिताते हैं: 13 अप्रैल तक वक्री, उसके बाद मार्गी।
- सिंह, 26 जून से 26 नवंबर तक। गुरु फिर सूर्य की राशि में आते हैं, जो उनके मित्र हैं, और इस बार सीधी चाल से इसे पार करते हैं।
- कन्या, 26 नवंबर से। वर्ष के अंत में गुरु बुध की राशि कन्या में पहुँचते हैं। यह पहला प्रवास छोटा है: 2028 के आरंभ में गुरु वक्री होते हैं और 28 फ़रवरी 2028 को फिर सिंह में लौट आते हैं।
गुरु का 2027, मिनट तक:गुरु गोचर 2027 →गुरु वक्री 2027 →गुरु अस्त 2027 →
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हर पंक्ति एक चंद्र राशि है। हर खाने में वह भाव है जिसमें उस अवधि में गुरु रहते हैं, चंद्र राशि से गिनकर।
| चंद्र राशि | कर्क25 जनवरी से 26 जून तक | सिंह26 जून से 26 नवंबर तक | कन्या26 नवंबर से |
|---|---|---|---|
| मेष | चतुर्थ · मिश्रित (प्रथम, तृतीय, चतुर्थ, दशम) | पंचम · अनुकूल (द्वितीय, पंचम, सप्तम, नवम, एकादश) | षष्ठ · धीमी प्रगति (षष्ठ, अष्टम, द्वादश) |
| वृषभ | तृतीय · मिश्रित (प्रथम, तृतीय, चतुर्थ, दशम) | चतुर्थ · मिश्रित (प्रथम, तृतीय, चतुर्थ, दशम) | पंचम · अनुकूल (द्वितीय, पंचम, सप्तम, नवम, एकादश) |
| मिथुन | द्वितीय · अनुकूल (द्वितीय, पंचम, सप्तम, नवम, एकादश) | तृतीय · मिश्रित (प्रथम, तृतीय, चतुर्थ, दशम) | चतुर्थ · मिश्रित (प्रथम, तृतीय, चतुर्थ, दशम) |
| कर्क | प्रथम · मिश्रित (प्रथम, तृतीय, चतुर्थ, दशम) | द्वितीय · अनुकूल (द्वितीय, पंचम, सप्तम, नवम, एकादश) | तृतीय · मिश्रित (प्रथम, तृतीय, चतुर्थ, दशम) |
| सिंह | द्वादश · धीमी प्रगति (षष्ठ, अष्टम, द्वादश) | प्रथम · मिश्रित (प्रथम, तृतीय, चतुर्थ, दशम) | द्वितीय · अनुकूल (द्वितीय, पंचम, सप्तम, नवम, एकादश) |
| कन्या | एकादश · अनुकूल (द्वितीय, पंचम, सप्तम, नवम, एकादश) | द्वादश · धीमी प्रगति (षष्ठ, अष्टम, द्वादश) | प्रथम · मिश्रित (प्रथम, तृतीय, चतुर्थ, दशम) |
| तुला | दशम · मिश्रित (प्रथम, तृतीय, चतुर्थ, दशम) | एकादश · अनुकूल (द्वितीय, पंचम, सप्तम, नवम, एकादश) | द्वादश · धीमी प्रगति (षष्ठ, अष्टम, द्वादश) |
| वृश्चिक | नवम · अनुकूल (द्वितीय, पंचम, सप्तम, नवम, एकादश) | दशम · मिश्रित (प्रथम, तृतीय, चतुर्थ, दशम) | एकादश · अनुकूल (द्वितीय, पंचम, सप्तम, नवम, एकादश) |
| धनु | अष्टम · धीमी प्रगति (षष्ठ, अष्टम, द्वादश) | नवम · अनुकूल (द्वितीय, पंचम, सप्तम, नवम, एकादश) | दशम · मिश्रित (प्रथम, तृतीय, चतुर्थ, दशम) |
| मकर | सप्तम · अनुकूल (द्वितीय, पंचम, सप्तम, नवम, एकादश) | अष्टम · धीमी प्रगति (षष्ठ, अष्टम, द्वादश) | नवम · अनुकूल (द्वितीय, पंचम, सप्तम, नवम, एकादश) |
| कुंभ | षष्ठ · धीमी प्रगति (षष्ठ, अष्टम, द्वादश) | सप्तम · अनुकूल (द्वितीय, पंचम, सप्तम, नवम, एकादश) | अष्टम · धीमी प्रगति (षष्ठ, अष्टम, द्वादश) |
| मीन | पंचम · अनुकूल (द्वितीय, पंचम, सप्तम, नवम, एकादश) | षष्ठ · धीमी प्रगति (षष्ठ, अष्टम, द्वादश) | सप्तम · अनुकूल (द्वितीय, पंचम, सप्तम, नवम, एकादश) |
1 से 25 जनवरी तक गुरु सिंह में ही रहते हैं, इसलिए सिंह वाला स्तंभ वर्ष के पहले कुछ सप्ताहों पर भी लागू होता है।
यह चंद्र राशि से गुरु के गोचर को पढ़ने की शास्त्रीय पद्धति है। इससे किसी अवधि का स्वर पता चलता है, उसका परिणाम नहीं; परिणाम आपकी अपनी कुंडली और चल रही दशा तय करती हैं।
अपनी चंद्र राशि पता नहीं? जन्म-विवरण से जानें →
कौन-सा भाव किस विषय का है
- प्रथम: स्वयं, शरीर और समग्र दिशा
- द्वितीय: धन, परिवार और वाणी
- तृतीय: प्रयास, भाई-बहन और छोटी यात्राएँ
- चतुर्थ: घर, माता, संपत्ति और मन की शांति
- पंचम: संतान, विद्या, रचनात्मक कार्य और प्रेम
- षष्ठ: दैनिक कार्य, स्वास्थ्य, ऋण और प्रतिद्वंद्वी
- सप्तम: विवाह, साझेदारी और जनसंपर्क
- अष्टम: आकस्मिक परिवर्तन, विरासत और गुप्त बातें
- नवम: भाग्य, धर्म, मार्गदर्शक और लंबी यात्राएँ
- दशम: करियर, पद-प्रतिष्ठा और सार्वजनिक कार्य
- एकादश: लाभ, आय, मित्र और इच्छाएँ
- द्वादश: व्यय, दूर देश, विश्राम और मुक्ति
करियर, धन और विवाह, तालिका से
नीचे की तीनों सूचियाँ सीधे तालिका से बनी हैं। हर सूची उन भावों के नाम बताती है जिन्हें परंपरा जीवन के उस क्षेत्र से जोड़ती है, और उन चंद्र राशियों के नाम, जिनके उस भाव से होकर गुरु गुज़रते हैं, तिथियों सहित।
करियर
दशम भाव कार्य और पद-प्रतिष्ठा का है; एकादश भाव लाभ और प्रयासों के फल का। इन चंद्र राशियों के लिए गुरु इनमें से किसी एक भाव से होकर गुज़रते हैं:
- तुला: दशम भाव, 25 जनवरी से 26 जून तक
- कन्या: एकादश भाव, 25 जनवरी से 26 जून तक
- वृश्चिक: दशम भाव, 26 जून से 26 नवंबर तक
- तुला: एकादश भाव, 26 जून से 26 नवंबर तक
- धनु: दशम भाव, 26 नवंबर से
- वृश्चिक: एकादश भाव, 26 नवंबर से
धन
द्वितीय भाव संचित धन और परिवार का है; एकादश भाव आय और लाभ का। इन चंद्र राशियों के लिए गुरु इनमें से किसी एक भाव से होकर गुज़रते हैं:
- मिथुन: द्वितीय भाव, 25 जनवरी से 26 जून तक
- कन्या: एकादश भाव, 25 जनवरी से 26 जून तक
- कर्क: द्वितीय भाव, 26 जून से 26 नवंबर तक
- तुला: एकादश भाव, 26 जून से 26 नवंबर तक
- सिंह: द्वितीय भाव, 26 नवंबर से
- वृश्चिक: एकादश भाव, 26 नवंबर से
अपनी कुंडली के धन-भाव और धन योग जानने के लिए: धन बोध, आपकी धन रिपोर्ट →
विवाह और संबंध
सप्तम भाव विवाह और साझेदारी का है; पंचम भाव प्रेम और संतान का। इन चंद्र राशियों के लिए गुरु इनमें से किसी एक भाव से होकर गुज़रते हैं:
- मकर: सप्तम भाव, 25 जनवरी से 26 जून तक
- मीन: पंचम भाव, 25 जनवरी से 26 जून तक
- कुंभ: सप्तम भाव, 26 जून से 26 नवंबर तक
- मेष: पंचम भाव, 26 जून से 26 नवंबर तक
- मीन: सप्तम भाव, 26 नवंबर से
- वृषभ: पंचम भाव, 26 नवंबर से
विवाह की तैयारी कर रहे हैं?दो कुंडलियों का गुण मिलान करें →विवाह मुहूर्त 2027, माह अनुसार →
आपकी कुंडली में गुरु
यह तालिका चंद्र राशि से गिनी गई है, इसलिए एक ही चंद्र राशि वाले सभी लोगों के लिए एक जैसी है। आपकी अपनी कुंडली में गुरु का 2027 आपके लग्न, गुरु के स्वामित्व वाले भावों और चल रही दशा पर भी निर्भर करता है। राशिफल 2027 की मुफ़्त पहली झलक इसे आपके जन्म-विवरण से पढ़ती है।
देखें, गुरु आपकी कुंडली के किस भाव में हैंगुरु गोचर 2027: प्रश्न और उत्तर
2027 में गुरु किन राशियों में गोचर करेंगे?
तीन राशियों में: 25 जनवरी से 26 जून तक कर्क में, 26 जून से 26 नवंबर तक सिंह में, और 26 नवंबर से कन्या में। वर्ष का आरंभ गुरु सिंह में वक्री अवस्था में करते हैं और 25 जनवरी को कर्क में लौटते हैं।
2027 में गुरु सिंह राशि में कब प्रवेश करेंगे?
26 जून 2027 को, सीधी चाल से। गुरु पहली बार 31 अक्टूबर 2026 को सिंह में आए थे, वहीं वक्री हुए और 25 जनवरी 2027 को कर्क में लौट गए। 26 जून से वे 26 नवंबर तक सिंह में रहते हैं।
गुरु कन्या राशि में कब आएँगे?
26 नवंबर 2027 को। यह पहला प्रवास छोटा है: 2028 के आरंभ में गुरु वक्री होते हैं और 28 फ़रवरी 2028 को फिर सिंह में लौट आते हैं।
क्या 2027 में गुरु वक्री रहेंगे?
वर्ष के आरंभ में। गुरु 13 दिसंबर 2026 को सिंह में वक्री हुए थे और 13 अप्रैल 2027 को कर्क में मार्गी होते हैं। इसके बाद वे 2028 के आरंभ तक फिर वक्री नहीं होते।
2027 में किन चंद्र राशियों के लिए गुरु अनुकूल भाव में रहेंगे?
हर चंद्र राशि को वर्ष में कम-से-कम एक ऐसी अवधि मिलती है। गुरु कर्क में (25 जनवरी से 26 जून): मिथुन, कन्या, वृश्चिक, मकर और मीन। गुरु सिंह में (26 जून से 26 नवंबर): मेष, कर्क, तुला, धनु और कुंभ। गुरु कन्या में (26 नवंबर से): वृषभ, सिंह, वृश्चिक, मकर और मीन।
2027 में किन चंद्र राशियों के सप्तम भाव में गुरु रहेंगे?
कर्क में रहते हुए गुरु मकर राशि के, सिंह में रहते हुए कुंभ राशि के, और 26 नवंबर से कन्या में मीन राशि के सप्तम भाव में होते हैं। परंपरा में चंद्र राशि से सप्तम भाव में गुरु का गोचर विवाह की बातचीत के लिए अनुकूल माना जाता है; विवाह की तिथि फिर भी वर-वधू की अपनी कुंडलियों और मुहूर्त से तय होती है।
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सभी समय भारतीय मानक समय में; निरयण राशिचक्र, लाहिड़ी अयनांश, खगोलीय गणना। यही 2027 का आकाश राशिफल 2027 पुस्तक की गणना का आधार है।
