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राहु-केतु गोचर 2027

राहु-केतु गोचर 2027: मकर में राहु, कर्क में केतु

राहु और केतु सदा एक-दूसरे के ठीक सामने रहते हैं, इसलिए वे एक धुरी की तरह काम करते हैं: राहु खींचते हैं, केतु छुड़ाते हैं। 5 दिसंबर 2026 को यह धुरी मकर और कर्क पर आ जाती है और पूरे 2027 वहीं टिकी रहती है।

2027 के आकाश की पूरी मार्गदर्शिका: ग्रह गोचर 2027

एक ओर शाम का व्यस्त शहर, दूसरी ओर भोर की शांत नदी: राहु का खिंचाव और केतु की विरक्ति

राहु मकर मेंखिंचाव

केतु कर्क मेंविरक्ति

5 दिसंबर 2026

राशि परिवर्तन: 5 दिसंबर 2026, रात 10:32 बजे

PanchangBodh Editorial
5 मिनट में पढ़ें
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राशि परिवर्तन

5 दिसंबर 2026 को रात 10:32 बजे राहु कुंभ से निकलकर मकर में और केतु सिंह से कर्क में आते हैं। 24 जून 2028 तक, यानी लगभग 18 महीने, दोनों यहीं रहते हैं; हर राशि में ये लगभग इतना ही समय बिताते हैं। राहु और केतु सदा राशिचक्र में उलटी दिशा में चलते हैं, इसलिए इनकी अगली राशियाँ धनु और मिथुन हैं।

यह पृष्ठ राहु-केतु की मध्यम स्थिति लेता है, जैसे राशिफल 2027 पुस्तक लेती है। कुछ पंचांग इनकी स्पष्ट स्थिति लेते हैं, जो मध्यम स्थिति के आसपास डोलती रहती है, इसलिए उनमें राशि परिवर्तन की तिथि कुछ दिन या सप्ताह आगे-पीछे हो सकती है।

धुरी, मिनट तक:राहु गोचर 2027 →केतु गोचर 2027 →

आपकी धुरी

राहु और केतु सदा छह राशियों की दूरी पर रहते हैं। तालिका में अपनी चंद्र राशि देखें: वह बताती है कि उससे गिनने पर राहु किस भाव में हैं, और केतु किस भाव में, जो सदा राहु के ठीक सामने वाला भाव होता है।

मेषवृषभमिथुनकर्कसिंहकन्यातुलावृश्चिकधनुमकरकुंभमीनराहुकेतु
हर चंद्र राशि से राहु और केतु का भाव, पूरे 2027
चंद्र राशिराहु: खिंचावकेतु: विरक्ति
मेषदशम · करियरचतुर्थ · घर
वृषभनवम · भाग्यतृतीय · पराक्रम
मिथुनअष्टम · परिवर्तनद्वितीय · धन
कर्कसप्तम · जीवनसाथीप्रथम · स्वयं
सिंहषष्ठ · दैनिक कार्यद्वादश · व्यय
कन्यापंचम · संतानएकादश · लाभ
तुलाचतुर्थ · घरदशम · करियर
वृश्चिकतृतीय · पराक्रमनवम · भाग्य
धनुद्वितीय · धनअष्टम · परिवर्तन
मकरप्रथम · स्वयंसप्तम · जीवनसाथी
कुंभद्वादश · व्ययषष्ठ · दैनिक कार्य
मीनएकादश · लाभपंचम · संतान

अपनी चंद्र राशि पता नहीं? जन्म-विवरण से जानें →जन्म-विवरण से अपने राहु और केतु जानें: राहु-केतु कैलकुलेटर और कार्मिक यात्रा रिपोर्ट →

खिंचाव और विरक्ति: भावों की छह जोड़ियाँ

यह धुरी सदा दो आमने-सामने के भावों को जोड़ती है, इसलिए बारह चंद्र राशियों में भावों की छह जोड़ियाँ बनती हैं। हर जोड़ी दो चंद्र राशियों को मिलती है: एक में राहु एक ओर होते हैं, दूसरी में दूसरी ओर।

प्रथम और सप्तम

स्वयं और साझेदारी: यह धुरी आपके अपने व्यक्तित्व और आपके जीवनसाथी के बीच चलती है।

  • मकर: राहु प्रथम भाव में, केतु सप्तम भाव में
  • कर्क: राहु सप्तम भाव में, केतु प्रथम भाव में

द्वितीय और अष्टम

जो आपके पास है और जो अचानक बदल जाता है: एक ओर धन, परिवार और वाणी, दूसरी ओर आकस्मिक परिवर्तन, विरासत और गुप्त बातें।

  • धनु: राहु द्वितीय भाव में, केतु अष्टम भाव में
  • मिथुन: राहु अष्टम भाव में, केतु द्वितीय भाव में

तृतीय और नवम

अपना प्रयास और अपना भाग्य: एक ओर पराक्रम, भाई-बहन और छोटी यात्राएँ, दूसरी ओर धर्म, गुरुजन और लंबी यात्राएँ।

  • वृश्चिक: राहु तृतीय भाव में, केतु नवम भाव में
  • वृषभ: राहु नवम भाव में, केतु तृतीय भाव में

चतुर्थ और दशम

घर और करियर: एक ओर जीवन का निजी आधार, दूसरी ओर सार्वजनिक कार्य और पद-प्रतिष्ठा।

  • तुला: राहु चतुर्थ भाव में, केतु दशम भाव में
  • मेष: राहु दशम भाव में, केतु चतुर्थ भाव में

पंचम और एकादश

जो आप रचते हैं और जो आप पाते हैं: एक ओर संतान, विद्या और प्रेम, दूसरी ओर आय, मित्र और इच्छाएँ।

  • कन्या: राहु पंचम भाव में, केतु एकादश भाव में
  • मीन: राहु एकादश भाव में, केतु पंचम भाव में

षष्ठ और द्वादश

रोज़ का दायित्व और मुक्ति: एक ओर कार्य, स्वास्थ्य और प्रतिद्वंद्वी, दूसरी ओर व्यय, दूर देश और विश्राम।

  • सिंह: राहु षष्ठ भाव में, केतु द्वादश भाव में
  • कुंभ: राहु द्वादश भाव में, केतु षष्ठ भाव में

2027 के ग्रहण मकर और कर्क में ही क्यों हैं

राहु और केतु वे दो बिंदु हैं जहाँ चंद्रमा का मार्ग सूर्य के मार्ग को काटता है। ग्रहण तभी लगता है जब सूर्य और चंद्रमा इनमें से किसी एक के पास एक सीध में आते हैं। पूरे वर्ष धुरी मकर और कर्क पर रहती है, इसलिए 2027 के दोनों सूर्य ग्रहण इन्हीं दो राशियों में पड़ते हैं, और तीन में से दो चंद्र ग्रहण भी।

  • 6 फ़रवरी: मकर में वलयाकार सूर्य ग्रहणधुरी पर
  • 21 फ़रवरी: सिंह में उपच्छाया चंद्र ग्रहण
  • 18 जुलाई: मकर में उपच्छाया चंद्र ग्रहणधुरी पर
  • 2 अगस्त: कर्क में पूर्ण सूर्य ग्रहणधुरी पर
  • 17 अगस्त: मकर में उपच्छाया चंद्र ग्रहणधुरी पर

2 अगस्त का सूर्य ग्रहण, कर्क में, भारत से आंशिक रूप में दिखाई देगा।

सूर्य ग्रहण, 2 अगस्त 2027 →2027 के सभी ग्रहण →

आपकी अपनी धुरी

यह तालिका चंद्र राशि से गिनी गई है, इसलिए एक ही चंद्र राशि वाले सभी लोगों के लिए एक जैसी है। आपकी अपनी कुंडली में यह धुरी लग्न से गिने गए भावों से भी गुज़रती है, और राहु या केतु की दशा चल रही हो तो इसका महत्व और बढ़ जाता है। राशिफल 2027 की मुफ़्त पहली झलक इसे आपके जन्म-विवरण से पढ़ती है।

देखें, यह धुरी आपकी कुंडली के किन भावों से गुज़रती है

राहु-केतु गोचर 2027: प्रश्न और उत्तर

राहु और केतु राशि कब बदलेंगे?

5 दिसंबर 2026 को, रात 10:32 बजे (भारतीय मानक समय): राहु कुंभ से मकर में और केतु सिंह से कर्क में प्रवेश करते हैं। इनका अगला राशि परिवर्तन 24 जून 2028 को होगा, धनु और मिथुन में।

2027 में राहु किस राशि में रहेंगे?

पूरे वर्ष मकर में। राहु 5 दिसंबर 2026 को मकर में प्रवेश करते हैं और 24 जून 2028 तक वहीं रहते हैं।

2027 में केतु किस राशि में रहेंगे?

पूरे वर्ष कर्क में, सदा राहु के ठीक सामने। केतु 5 दिसंबर 2026 को कर्क में प्रवेश करते हैं और 24 जून 2028 तक वहीं रहते हैं।

राहु मकर राशि में कब तक रहेंगे?

लगभग 18 महीने: 5 दिसंबर 2026 से 24 जून 2028 तक। राहु और केतु हर राशि में लगभग इतना ही समय बिताते हैं।

ग्रहण का राहु-केतु से क्या संबंध है?

राहु और केतु वे दो बिंदु हैं जहाँ चंद्रमा का मार्ग सूर्य के मार्ग को काटता है। ग्रहण तभी लग सकता है जब सूर्य और चंद्रमा इनमें से किसी एक बिंदु के पास एक सीध में हों, इसलिए ग्रहण सदा इसी धुरी के पास पड़ते हैं। 2027 में दोनों सूर्य ग्रहण मकर और कर्क में हैं।

किसी दूसरे पंचांग में राशि परिवर्तन की तिथि अलग क्यों है?

संभव है वह राहु-केतु की मध्यम स्थिति के बजाय स्पष्ट स्थिति लेता हो। स्पष्ट स्थिति मध्यम स्थिति के आसपास डोलती रहती है, इसलिए दोनों के राशि परिवर्तन में कुछ दिन या सप्ताह का अंतर आ सकता है। यह पृष्ठ, राशिफल 2027 पुस्तक की तरह, मध्यम स्थिति लेता है।

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सभी समय भारतीय मानक समय में; निरयण राशिचक्र, लाहिड़ी अयनांश, मध्यम राहु-केतु, खगोलीय गणना। यही 2027 का आकाश राशिफल 2027 पुस्तक की गणना का आधार है।