मकर लग्न तब बनता है जब जन्म के समय पूर्वी क्षितिज पर मकर राशि उदित हो रही हो। यह शनि का लग्न है, जो धैर्य, अनुशासन और धीमी पर टिकाऊ उन्नति का संकेत देता है। पंचम और दशम का स्वामी शुक्र यहाँ योगकारक है; शनि और चंद्रमा मारक हैं, और मंगल बाधकेश।
मकर लग्न: एक नज़र में
- स्वामी (लग्नेश)
- शनि
- तत्त्व
- पृथ्वी तत्त्व
- स्वभाव
- चर
- नक्षत्र
- उत्तराषाढ़ा (3 पाद), श्रवण (चारों पाद), धनिष्ठा (2 पाद)
- योगकारक
- शुक्र
- बाधक भाव
- एकादश भाव · मंगल
ध्यान दें: दैनिक राशिफल चंद्र राशि से पढ़ा जाता है, लग्न से नहीं। लग्न और राशि में अंतर →
मकर लग्न के लिए ग्रहों की भूमिका
हर ग्रह किन भावों का स्वामी है, और इस लग्न के लिए वह शुभ है या अशुभ।
| ग्रह | स्वामित्व | फल | |
|---|---|---|---|
| सूर्य | अष्टम भाव | सम | |
| चंद्र | सप्तम भाव | अशुभ | मारक |
| मंगल | चतुर्थ भाव और एकादश भाव | अशुभ | बाधकेश |
| बुध | षष्ठ भाव और नवम भाव | शुभ | |
| गुरु | तृतीय भाव और द्वादश भाव | अशुभ | |
| शुक्र | पंचम भाव और दशम भाव | शुभ | योगकारक |
| शनि | प्रथम भाव और द्वितीय भाव | शुभ | लग्नेशमारक |
| राहु | किसी राशि के स्वामी नहीं | अशुभ | |
| केतु | किसी राशि के स्वामी नहीं | अशुभ |
मकर लग्न में लग्नेश शनि दो भाव सँभालता है: प्रथम और द्वितीय (कुम्भ)। इसलिए वह शुभ भी है और द्वितीयेश होने से मारक भी, यद्यपि परंपरा लग्नेश को जातक का रक्षक मानती है, जिससे उसका मारक पक्ष प्रायः गौण रहता है। योगकारक शुक्र है, जो पंचम (वृषभ) और दशम (तुला) का स्वामी है, यानी एक त्रिकोण और एक केंद्र का। षष्ठ और नवम का स्वामी बुध नवम के बल पर शुभ गिना जाता है। चर लग्न के लिए बाधा का भाव एकादश होता है, अतः चतुर्थ और एकादश का स्वामी मंगल यहाँ बाधकेश है और अशुभ माना जाता है। सप्तमेश चंद्रमा अशुभ और मारक है, जबकि नैसर्गिक शुभ गुरु तृतीय तथा द्वादश के स्वामित्व के कारण इस लग्न के लिए अनुकूल नहीं रहता।
अपनी कुंडली में इन ग्रहों की स्थिति के लिए: शुभ और अशुभ ग्रह · योगकारक ग्रह · मारकेश
स्वभाव और शरीर
मकर लग्न के जातक प्रायः संयत, व्यावहारिक और कर्तव्यनिष्ठ होते हैं। लग्नेश शनि उन्हें समय का मूल्य सिखाता है; वे जल्दबाज़ी में वादा नहीं करते, पर जो ज़िम्मेदारी लेते हैं उसे अंत तक निभाने का प्रयास करते हैं। पहली मुलाक़ात में वे संकोची या गंभीर लग सकते हैं, और भरोसा जमने के बाद ही उनका अपनापन खुलकर सामने आता है।
पृथ्वी तत्त्व और चर स्वभाव का यह मेल उन्हें ज़मीन से जोड़े रखता है और साथ ही आगे बढ़ने को प्रेरित भी करता है। वे लक्ष्य तय करके सीढ़ी-दर-सीढ़ी चढ़ना पसंद करते हैं; इसी धुन में कभी-कभी अपनी भावनाओं को पीछे रखकर केवल काम पर ध्यान देने की प्रवृत्ति भी दिखती है। परंपरा इस लग्न को दुबली-लंबी काया, उभरी हड्डियों और गंभीर मुखमुद्रा से जोड़ती है, पर लग्न में स्थित ग्रह और शनि की अपनी स्थिति इस वर्णन को काफ़ी बदल सकते हैं।
करियर और कर्म-क्षेत्र
मकर लग्न का दशम भाव तुला है, जिसका स्वामी शुक्र है, और यही शुक्र इस लग्न का योगकारक भी है। जब कर्म-भाव का स्वामी स्वयं योगकारक हो, तो करियर का पक्ष इस कुंडली में विशेष महत्त्व पा जाता है। तुला संतुलन, न्याय और लेन-देन की राशि है; इसलिए कानून, परामर्श, व्यापार, बैंकिंग, डिज़ाइन और फ़ैशन जैसे क्षेत्र, या ऐसा कोई भी काम जिसमें लोगों के बीच तालमेल बिठाना पड़े, इस लग्न को रास आता है।
मकर शनि की पृथ्वी राशि है, इसलिए सुव्यवस्थित संगठन, प्रशासन, इंजीनियरिंग, निर्माण और लंबी अवधि की परियोजनाएँ भी इनके स्वभाव से मेल खाते हैं। इस लग्न में सफलता प्रायः लगातार परिश्रम से बनती है, किसी एक छलाँग से नहीं। उन्नति का समय जानने के लिए शुक्र का बल, दशम भाव में बैठे ग्रह और शुक्र या शनि की दशा-अंतर्दशा को मिलाकर देखें; लग्न अकेले किसी तय उम्र की ओर संकेत नहीं करता।
विवाह और संबंध
मकर लग्न का सप्तम भाव कर्क है, जिसका स्वामी चंद्रमा है। पृथ्वी तत्त्व के इस लग्न के ठीक सामने जल तत्त्व की राशि आती है, इसलिए जीवनसाथी प्रायः भावुक, परिवार-प्रिय और घर-गृहस्थी को महत्त्व देने वाला बताया जाता है। मकर लग्न का जातक प्रेम को कर्तव्य निभाकर व्यक्त करता है, जबकि साथी उसे बातों और स्नेह-भरे व्यवहार में भी देखना चाहता है।
चंद्रमा इस लग्न के लिए अशुभ भी गिना जाता है और मारक भी। इसका अर्थ यह नहीं कि विवाह कठिन होगा; बात बस इतनी है कि मन की उथल-पुथल यहाँ वैवाहिक जीवन पर जल्दी असर डालती है। बलवान और शुभ दृष्टि वाला चंद्रमा इसी सप्तम भाव से गहरी आत्मीयता देता है। विवाह का समय पढ़ने के लिए सप्तम भाव, चंद्रमा की स्थिति, शुक्र और नवांश कुंडली को दशा के साथ देखें।
स्वास्थ्य के संकेत
काल-पुरुष में मकर राशि घुटनों से जुड़ी है, और लग्नेश शनि परंपरागत रूप से हड्डियों, जोड़ों, दाँतों और त्वचा का कारक है। इसलिए मकर लग्न के लिए घुटनों, जोड़ों की जकड़न और हड्डियों की मज़बूती पर ध्यान देने की बात कही जाती है, ख़ासकर जब शनि पीड़ित हो। बिना विश्राम लगातार काम करने की आदत थकान को और बढ़ा सकती है। ये बातें ज्योतिषीय संकेत भर हैं, किसी रोग का निदान नहीं; कोई भी शारीरिक कष्ट हो तो योग्य चिकित्सक से परामर्श लें।
मकर लग्न कितनी देर उदित रहता है
उत्तर भारत में मकर का उदय-काल औसत से कुछ छोटा रहता है, और दक्षिण की ओर जाने पर यह बढ़ता है। चेन्नई में मकर लग्न का समय-खंड दिल्ली की तुलना में लगभग 11 मिनट अधिक रहता है।
| शहर | उदय-काल |
|---|---|
| नई दिल्ली | 1 घंटे 42 मिनट |
| लखनऊ | 1 घंटे 44 मिनट |
| कोलकाता | 1 घंटे 47 मिनट |
| मुंबई | 1 घंटे 49 मिनट |
| चेन्नई | 1 घंटे 53 मिनट |
| बेंगलुरु | 1 घंटे 53 मिनट |
खगोलीय गणना, लाहिरी अयनांश। यह अवधि पूरे वर्ष लगभग एक-सी रहती है; हर दिन बस इसका आरंभ लगभग चार मिनट पहले हो जाता है। आज की लग्न सारणी →
मकर लग्न के नक्षत्र और पाद
लग्न का अंश जिस पाद में पड़ता है, उसी से नवांश लग्न बनता है।
| अंश | नक्षत्र | पाद | नवांश राशि |
|---|---|---|---|
| 0°00′–3°20′ | उत्तराषाढ़ा | 2 | मकरवर्गोत्तम |
| 3°20′–6°40′ | उत्तराषाढ़ा | 3 | कुम्भ |
| 6°40′–10°00′ | उत्तराषाढ़ा | 4 | मीन |
| 10°00′–13°20′ | श्रवण | 1 | मेष |
| 13°20′–16°40′ | श्रवण | 2 | वृषभ |
| 16°40′–20°00′ | श्रवण | 3 | मिथुन |
| 20°00′–23°20′ | श्रवण | 4 | कर्क |
| 23°20′–26°40′ | धनिष्ठा | 1 | सिंह |
| 26°40′–30°00′ | धनिष्ठा | 2 | कन्या |
जब लग्न और नवांश लग्न एक ही राशि हों, तो लग्न वर्गोत्तम कहलाता है और बलवान माना जाता है। अपना नवांश लग्न देखें →
मकर लग्न वाले प्रसिद्ध लोग
केवल वे लोग जिनका जन्म समय शोध से प्रमाणित है।
लग्नेश शनि किस भाव में हैं?
मकर लग्न का पूरा फल लग्नेश शनि के भाव से खुलता है। लग्नेश जिस भाव में हो, जीवन का ध्यान उसी ओर अधिक जाता है। बारह भावों में लग्नेश का फल →
सम्पूर्ण पाठ
कार्मिक यात्रा
मकर लग्न का स्वामी शनि है, जो कर्म और काल का ग्रह है। कार्मिक यात्रा आपकी अपनी कुंडली से शनि के समय-चक्र, राहु-केतु अक्ष और कर्म के लेखे-जोखे को पढ़ती है।
आत्मकारक · केतु · राहु-केतु अक्ष · कर्म का लेखा-जोखा · छह ऋण · चंद्र नक्षत्र · शनि का समय-चक्र · वक्री ग्रह · इष्ट देवता
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बारहों लग्न
अपना लग्न जानें
जन्म तिथि, समय और स्थान से लग्न, लग्नेश, नवांश लग्न और चंद्र लग्न एक साथ।
लग्न कैलकुलेटरअक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मकर लग्न का स्वामी कौन है?
शनि। वह मकर के साथ कुम्भ का भी स्वामी है, और मकर लग्न में कुम्भ राशि द्वितीय भाव में पड़ती है। इसलिए यहाँ लग्नेश धन, वाणी और कुटुंब का भाव भी सँभालता है, और शनि की स्थिति इन तीनों विषयों पर एक साथ प्रकाश डालती है।
मकर लग्न का योगकारक ग्रह कौन है?
शुक्र। वह पंचम भाव (वृषभ) और दशम भाव (तुला) का स्वामी है: पंचम त्रिकोण है और दशम केंद्र। बलवान शुक्र की दशा में बुद्धि, संतान, प्रतिष्ठा और कर्म-क्षेत्र से जुड़े शुभ अवसर एक साथ खुल सकते हैं, पर वास्तविक फल उसकी स्थिति और बल पर निर्भर रहेगा।
मकर लग्न के मारक ग्रह कौन-से हैं?
द्वितीय भाव का स्वामी शनि और सप्तम भाव (कर्क) का स्वामी चंद्रमा। मारक शब्द आयु का निर्णय नहीं करता; ये वे ग्रह हैं जिनकी दशा में स्वास्थ्य की नियमित देखभाल को प्राथमिकता देना समझदारी है। शनि लग्नेश भी है, इसलिए उसकी दशा को केवल मारक के रूप में पढ़ना अधूरा होगा।
मकर लग्न का भाग्योदय कब होता है?
भाग्योदय किसी तय आयु से नहीं, ग्रहों के समय से जुड़ा है। मकर लग्न में नवम भाव कन्या है और उसका स्वामी बुध; बुध षष्ठ का भी स्वामी है, इसलिए भाग्य प्रायः लगातार परिश्रम, सेवा या प्रतिस्पर्धा में जीत के रास्ते खुलता है। इस ग्रह का बल, उसकी स्थिति और उसकी महादशा-अंतर्दशा का क्रम ही इसका समय बताते हैं।
मकर लग्न में मंगल शुभ है या अशुभ?
तालिका में मंगल अशुभ गिना गया है। वह चतुर्थ (मेष) और एकादश (वृश्चिक) का स्वामी है; चतुर्थ केंद्र है, पर एकादश का स्वामित्व उसे अशुभता की ओर झुकाता है। चर लग्न के लिए एकादश बाधक स्थान भी है, इसलिए मंगल बाधकेश है: उसकी दशा लाभ और घर-संपत्ति से जुड़े प्रश्न सामने लाती है, जिनके हल में देर या रुकावट संभव है।
मकर लग्न वालों की साढ़ेसाती कब शुरू होती है?
साढ़ेसाती लग्न से नहीं, चंद्र राशि से गिनी जाती है: जब गोचर का शनि जन्म-चंद्रमा से द्वादश, प्रथम और द्वितीय राशि से गुज़रता है। मकर लग्न वाले व्यक्ति की चंद्र राशि कोई और भी हो सकती है, क्योंकि लग्न पूर्व में उदित राशि है और राशि वह, जिसमें जन्म के समय चंद्रमा था। दैनिक राशिफल भी चंद्र राशि से ही पढ़ा जाता है।